Air Pollution: शहर की हवा हुई 8 गुना ज्यादा जहरीली, न्यू गुरुग्राम में AQI 879 पहुंचा, जानें अपने इलाके का हाल
केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB) के आंकड़ों ने खतरे की घंटी बजा दी। विशेषकर नए गुरुग्राम के सेक्टर-51 और आसपास इलाके का एक्यूआई 430 और दिल्ली-जयपुर हाईवे के आसपास विकास सदन के इलाकों में एक्यूआई (AQI) का स्तर 422 के पार दर्ज किया गया

Air Pollution : दिल्ली से सटे गुरुग्राम में मंगलवार सुबह दमघोंटू होती हवा ने लोगों का सांस लेना दुभर कर दिया। जनवरी के इस महीने में पहली बार गुरुग्राम की हवा इतनी जहरीली हुई कि इसने पिछले कई रिकॉर्ड तोड़ दिए।
सोमवार की रात से ही हवा की गति मंद पड़ने लगी थी। मौसम विभाग के अनुसार, जब हवा की रफ्तार धीमी होती है, तो वायुमंडल में मौजूद प्रदूषक कण ऊपर जाने या बिखरने के बजाय जमीन की सतह के करीब जम जाते हैं। मंगलवार सुबह यही हुआ। गुरुग्राम की हवा में प्रदूषण का स्तर सामान्य से आठ गुना तक बढ़ गया।

केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB) के आंकड़ों ने खतरे की घंटी बजा दी। विशेषकर नए गुरुग्राम के सेक्टर-51 और आसपास इलाके का एक्यूआई 430 और दिल्ली-जयपुर हाईवे के आसपास विकास सदन के इलाकों में एक्यूआई (AQI) का स्तर 422 के पार दर्ज किया गया, जिसे गंभीर श्रेणी में रखा जाता है। हवा में प्रदूषण का स्तर सामान्य से आठ गुना तक ज्यादा रहा।

जहां सरकारी आंकड़े डरा रहे थे, वहीं निजी मौसम एजेंसियों के मीटरों ने स्थिति की भयावहता को और स्पष्ट कर दिया। रिपोर्ट्स के अनुसार नए गुरुग्राम के कुछ हिस्सों में एक्यूआई 879 तक जा पहुंचा। विकास सदन जैसे प्रशासनिक केंद्र के पास यह स्तर 670 रिकॉर्ड किया गया। इन आंकड़ों का मतलब है कि एक स्वस्थ व्यक्ति भी यदि कुछ घंटे इस हवा में बिताए, तो उसे फेफड़ों और हृदय संबंधी गंभीर समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है।


नए गुरुग्राम और हाईवे के आसपास प्रदूषण की मार सबसे अधिक होने के पीछे कई कारण हैं। बड़े पैमाने पर चल रहे रियल एस्टेट प्रोजेक्ट्स से उड़ने वाली धूल। हाईवे पर ट्रकों और भारी वाहनों का निरंतर आवागमन। खुले मैदानों में धूल भरी हवाएं जब शांत होती हैं, तो धूल के कण स्थिर हो जाते हैं।
मंगलवार की सुबह शहर की सड़कों पर विजिबिलिटी बेहद कम थी। सुबह की सैर पर निकलने वाले बुजुर्ग सबसे ज्यादा प्रभावित हुए। अस्पतालों के ओपीडी में सांस लेने में तकलीफ, आंखों में जलन और लगातार खांसी के मरीजों की संख्या में अचानक उछाल देखा गया। डॉक्टरों ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि इस जहरीली हवा में बिना N-95 मास्क के बाहर निकलना सीधे फेफड़ों को नुकसान पहुँचाना है।

प्रशासन की भूमिका और आगे की राह
ग्रेप (GRAP) के कड़े नियमों के बावजूद, जमीनी स्तर पर धूल नियंत्रण के उपाय नाकाफी नजर आ रहे हैं। इस ‘दमघोंटू मंगलवार’ ने यह साबित कर दिया है कि केवल हवा की रफ्तार पर निर्भर रहना समाधान नहीं है। जब तक शहर के भीतर धूल और उत्सर्जन के स्रोतों पर कड़ा प्रहार नहीं होगा, गुरुग्राम के लोग इसी तरह जहरीली हवा के साये में जीने को मजबूर रहेंगे।











